शुक्रवार, 19 दिसंबर 2008
अर्थशास्त्र - १
अर्थशास्त्र एक प्राचीन प्रबंध शासन के बारे में है. इस प्रबंध का काल तय नहीं है. लेकिन विश्वविद्यालय पंडित थॉमस त्रौत्मान जो मिशिगन में प्रोफेसर है बहस करता है कि लगभग डेढ़ सौ अ.डी. अर्थशास्त्र लेखा जाता था. अर्थशास्त्र में बहुत विषय प्राचीन हिंदुस्तान के बारे में हैं. लेकिन मेरा शोध के लिए मैं ने अर्थशास्त्र पढ़ी. और मुझे सबसे दिलचस्प हिस्से हैं जो कपड़े और कपड़े उद्योग के बारे में हैं. उस समय में रजा के पास कई कारखाने हैं. और इन कारखाने में बहुत सूत काते जाते थे और कपड़े बुना जाते थे. वे कारीगर मज़दूरी पानी जाती थीं. और सब नियम उनका काम के बारे में अर्थशास्त्र में हैं. और भी अर्थशास्त्र में नियम धोबी और दर्ज़ी के काम भी के बारे में हैं. उदाहरण के लिए धोबी चिकना पत्थर या लकड़ी ही पर कपड़े धो सकते थे. और दो-तिन दिन ही ख़त्म होना चाहिए. और भी अर्थशास्त्र में कपड़े धोने का मूल्य निर्धारित किया जाता था.
अहमदाबाद - २
ताकि कैलिको संग्रहालय मिलें आप पथ प्रदर्शक के साथ जाना चाहिए. और हर दिन कुछ-कुछ ही मिलने का समय हैं. लेकिन साराभाई हवेली के दरवाज़े के अन्दर सबसे सुंदर संग्रहालय है. इसलिए वहाँ जाने में फ़ायदा है. हवेली में कोई पुराने इमारत और सुंदर बाग़ हैं. एक-एक इमारत में वस्त्र के प्रदर्शन हैं. और हर प्रदर्शन में इतने शानदार कपड़े हैं. और भी इन कपड़े के बारे में वे पथ प्रदर्शक बहुत होशियार हैं. संग्रहालय जाकर मैं एक खास किताबों की दुकान गयी. इस दुकान में कला ही की किताब हैं. इसलिए ज़्यादातर किताब बड़ी और बहुत फ़ोटो या चित्र के साथ हैं. जब वहाँ मैं गयी तब दुकानदार ने मुझे बहुत किताबें जो वस्त्र और वस्त्र उद्योग के बारे में थीं दिखाया. और कुछ की इन किताबें मेरा शोध के लिए बहुत मददगार होगीं. इसलिए मैं ने कुछ खरीदी.
अहमदाबाद - १
इस गर्मी को जब मैं भारत में थी तब मैं अहमदाबाद भी गयी. वहाँ मैं कुछ खरीदना करती थी. और भी मैं वह बहुत प्रसिद्द वस्त्र संग्रहालय जो अहमदाबाद में है गयी. इस संग्रहालय का नाम कैलिको संग्रहालय के वस्त्र है और १९४९ में स्थापित किया जाता था. आजकल एक के सबसे महत्त्वपूर्ण वस्त्र संग्रहालय दुनिया में है. इस संग्रहालय के संग्रह में पाँच शताब्दी के वस्त्र है. जब से पंद्रह की शताब्दी अहमदाबाद केन्द्र का व्यापार वस्त्र उद्योग के लिए होता है. इसलिए जब अनंदा कुमारस्वामी श्री गौतम साराभाई के साथ फैसला किया कि एक संग्रहालय स्थापित करोगा तो अहमदाबाद में किए. उस बड़े औद्योगिक घर के "कैलिको" के साथ साराभाई और उसकी बहिन ने कैलिको संग्रहालय स्थापित किया. १९८२ में, यह संग्रहालय घर बदला. कैलिको मिल अहाते से गयी और साराभाई फौन्देशुं की हवेली में बस गया.
गुरुवार, 23 अक्टूबर 2008
"स्क्रीन" कि छपाई
दुसरे यात्रा संगनीर मैं कुछ कारखानों में कारीगरों से मिली. मैं चादर के कारखाने में गयी. इस कारखाने में चादर "स्क्रीन" के साथ छापा जाता है. लम्बी मेजों पर मोम फैलापा जाता है. बाद में सादे कपडे को मेजों पर रखा जाता है. तब दो आदमी साथ-साथ काम करते हैं. एक आदमी एक "स्क्रीन" कि बगल से पकड़ते हैं. और दुसरे आदमी बारी-बारी से स्याही को "स्क्रीन" पर रखते हैं. इस दंग से वे स्याही को कपडे पर फैलाते हैं. जल्दी-जल्दी वे हर रंग लगाते हैं. लगाने से पहले "किशान्गीर" से "ग्रे" कपडे बेचा जाता है. बाद में यह कपडा संगनीर में सफ़ेद किया जाता है. कारखाने में सफ़ेद किए हुए कपडे पहुँचते हैं. जिस कारखाने में मैं मिल हर दिन लगभग एक हजार चादरे "स्क्रीन" पर लगायी जाती हैं. और भी कारखाने जिनमे हाथ से छपाई है अक्सर "स्क्रीन" कि छपाई भी है. उधिरण के लिए एक कारखाने जिस का नाम "साक्षी" है कुछ हाथ कि छपाई है लेकिन "स्क्रीन" कि छपाई ज़्यादातर काम किया जाता है. इस कारखाने का मालिक ने मुझ से कहा कि इस हिस्से का कारखाना नई-सौ है. और हालांकि उसके परिवार के कारखाने में पहले से सिर्फ़ हाथ से छपाई कि जाती थी तो आजकल "स्क्रीन" का काम फायदा बनाता है.
अनोखी
जब मैं राजस्थान में थी तब मै अनोखी के संग्रहालय भी गयी. वह संग्रहालय आमेर में है खेरी गेट कि बगल में. संग्रहालय में छपाई कि कला दिखाई जाती है. तभी मुख्य प्रदर्शनी "परिवर्तन और प्रचलन छपाई कि कला, १९७०-२००५" है. मुझे संग्रहालय बहुत अच्छा लगा. हर कमरे में अलग-अलग प्रकार के कपडा है. मुझा हर प्रकार का कपडा देखना दिलचस्प लगा और हर प्रकार के बारे में सीखना थी. दो दुसरे प्रदर्शनी भी थी जो "अज्राख" और "बालोतरा" के बारे में थे. अज्राख एक प्रकार कि छपाई कि कला और रंगना है जिसमे प्राकृतिक रंग का इस्तेमाल करते है. एक मुख्य रंग अज्राख में ननि है. अज्राख का कपडा लाल नीला और सफ़ेद है. अज्राख में कई क्षेत्रीय भिन्नताएँ है और यह कपडा भारत-पाक सीमा पर दोनों किनारे बन जाते हैं. दूसरी प्रदर्शनी बालोतरा के बारे में थी. यह गाँव जो राजस्थान में है छपाई कि कला के लिए महत्त्वपूर्ण जगह है. क्योंकि बालोतरा रेगिस्तान में है और काफ़ी सुदूर है तो बहुत लोग परंपरागत चीज़ सब कामों के लिए इस्तेमाल करते हैं. इसलिए अभी भी एक ज़ोरदार गाँव परंपरागत छपाई कि कला के लिए है. प्रदर्शनी में थे छपाई कि कला दिखाई जाती थी और बहुत सुंदर थे.
संगनीर
इस गर्मी को मै जयपुर में दो महीने रहती थी. इस समय में मै कोई बार संगनीर गयी. संगनीर एक जगह जो जयपुर के पास है. संगनीर ऐतिहासिक केन्द्र वस्त्र उग्योग के लिए है. वहा कुछ कपरे के कारखाने में गयी. एक कारखाने में वे कारीगर कपडे प्राकृतिक रंग के साथ छापा लगाते है. उसके माल के पास बडी रंगी की छटा है. हर छापा कारीगर के द्दारा बनाते थे. और हर इस्तेमाल करते है. मसलन हाथी छापा लगाना तिन अलग-अलग हाथी के छपे का इस्तेमाल करते है. हर छापा अलग-अलग आकार है. इसलिए कारीगार हर छापे के साथ अलग-अलग रंग लगाते है. एक पेचीदा चित्र नतीजा है. रंग का चुनाव इस कला का महत्त्वपूर्ण फ्लू है. जब मै कालेज की विद्याथी थी तब एक कला की कक्षा ली. इस कक्षा में हम ने कागज़ छापा लगाया. हम अपने छपे बनाए और छपे हर अलग-अलग रंग की स्याही रखी. इन रंगवाले छापे के ऊपर हम ने कागज़ रखा और सारा कागज़ ख़ास औरज़ार के साथ दबाया. जब मै कपडे के कारखाने में थी तब मुझे इस कला की कक्षा याद आ रही थी. भविष्य में मै आशा करती हु कि कारखाने में कुछ काम करूं. सोचती हु कि वस्त्र उद्योग समझना अनुभव कारखाने में महत्त्वपूर्ण है. लेकिन वः महत्त्वपूर्ण ही नही है बहुत दिलचस्प और मज़ेदार होगा.
गुरुवार, 16 अक्टूबर 2008
मेरी कक्षा
पिछले हफ्ते के दौरान समय जल्दी-जल्दी बीता. मै अपनी कक्षा में बहुत जोश में आती हूँ. और मुझे हिन्दी पढ़ना पसंद है. इस सत्र में मै चार कक्षा लेती हू. सब कक्षा मुश्कील लेकिन सब बहुत मददगार भी है. एक कक्षा में हम सिमीऔतिक्स पद रहे है. मतलब हम साथर्क प्रतीक विश्लेष्ण करते है. यह सैद्धांतिक ढांचा मेरा शोध के लिए बहुत महत्तवपूर्ण होगा क्योंकि इस सैद्धांतिक ढाँचे में औजार सामान की संस्कृति को विश्लेष्ण करने के लिए है. दूसरी कक्षा में हम विद्यार्थी भारतीय इतिहास पदते है. हमारे केंद्र-बिंदु प्राचीन इतिहास है. मुझे यह इतिहास बहुत दिलचस्प है. मेरा अंतिम प्रोजेक्ट के लिए भारतीय सागर व्यापार पदुंगी. इस व्यापार में बहुत भारतीय कपरे अफ्रीका और एउरोप के साथ विनिमय किए. क्योंकि मेरा दिस्सेर्टेशन शोध वस्त्र उद्योग आजकाल के बारे में होगा तो यह इतिहास मुझे बहुत दिलचस्प है. मै एक और कक्षा भी ले रही हू. इस कक्षा में हम तरह-तरह भारतीय शोध पड़ते है. मै हिन्दी भी पद रही हू. मेरे लिए हिन्दी दोनों बहुत कठिन और मनोहर है. क्योंकि अभी मै उनितेद स्टातेस में हू तो ज़्यादा मुश्किल अपनी हिन्दी सुधारने के लिए है. लेकिन हमारी कक्षा बहुत मददगर है.
गुरुवार, 18 सितंबर 2008
मेरा दूसरा मैराथन...
अगले साल मै तीस होगी. मुझे लगता है की इस जन्मदिन बहुत बार है और एक महत्वपूर्ण स्थिति है. इसलिए सोचती हू की अगले साल मुझे कुछ खास चीज़ करना चाहिए. पहले मै फैसला की की एक मैराथन दौड़ुंगी. कुछ शोद मैराथन के बारे में करती थी और अभी वह सबसे अच्छा मैराथन मिली. यह मैराथन कालिफौर्निया में है. नगरीय मैराथन नही है. यह मैराथन का रास्ता सागर पहाडी और कुछ खेत के पास है. यह जगह का नाम बिग सुर है. और काफी प्रसिद्द है क्योंकि कोई कलाकार और लेखक वहा रहे थे. मै सोचती हू की बिग सुर सुंदर सुंदर होगा. और मै ट्रेनिंग के लिए बहुत जोश में आती हू. बाईस दीसेम्बुर मै ट्रेनिंग शुरू करुँगी. ट्रेनिंग अठारह हफ्ते होगा. थोडा-सा डरपोक हू की ट्रेनिंग एन अर्बुर की सर्दी में बहुत मुश्कील होगा लेकीन मै फिर भी जोश में आती हू. यह मैराथन मेरा दूसरा मैराथन होगा. जब मै छब्बीस थी तब मै अपना पहला मैराथन दौडी. वह मैराथन फिलाडेल्फिया में था. क्योंकि मरे माँ-बाप फिलाडेल्फिया में रहते है वे दोनों मुझे दौड़ती-दौड़ती देख सकते थे. मुझे फिलाडेल्फिया का मैराथन बहुत मज़ा आती थी. इसलिए सोचती हू की बिग सुर का मैराथन भी मज़ा होगा.
तब से वापस पहुँची...
सिर्फ़ चार हफ्ते जब से मै भारत से गयी. लेकीन मुझे लगता है की चार महीने हो गये. तब से अमेरीका वापस पहुँची मुझे बहुत कम करना है. पहले एक सम्मलेन न्यू मेक्सिको में गयी. इस सम्मलेन व्यापार संग और समाज के बारे में था. मुझे बहुत दिलचस्प था क्योंकि मेरा पि.एच.दी. शोध कुछ कम्पनी जो वस्त्र उद्योग में है के बारे में है. इस सम्मलेन के बाद मै बौस्तीं और न्यू हाम्प्शुर गयी. वहा मेरा भाई और उसका परिवार और मेरे माँ-बाप मिली. मेरे माँ-बाप एक बहुत सुंदर घर जो न्यू हाम्प्शुर में है के पास है. जब मै चोटी चोटी थी तब मेरा परिवार न्यू हाम्प्शुर में रहता था. हम फिलाडेल्फिया घर बदले क्योंकि मेरा बाप का न्य कम है. जब मै बाईस थी मेरे माँ-बाप न्यू हाम्प्शुर में घर बनाना फैसला किया. मुझे यह मकान सुच घर लगता है. इसलिए मै इस घर में समय बिताना आनंद आती है. लेकिन यह गरमी वहा सिर्फ़ दो-तिन दिन बितायी. और बाद में मिशीगान चलती थी. और तुंरत मेरी कक्षा शुरू कर रही थी. यह सत्र पाच क्लास लेती है. लेकीन सिर्फ़ तिन क्लास क्रेडिट के लिए है. यह तिन कक्षा हिन्दी इतीहास और अन्थ्रोपोलोगी है. सब बहुत दिलचस्प है. लेकीन मेरे क्लास और मेरा दूसरा कार्यकलाप के लिए मेरे पास बहुत कम है. यह ज़िन्दगी है, न?
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